Commerce : What is the Consumer Protection Act 1986

उपभोक्ता - जब व्यक्ति किसी वास्तु या सेवा को खरीदता है तथा उस वास्तु या सेवा का उप्बोग करता है या उसका लाग लेता है तो वः उपभोक्ता कहलाता है |

उपभोक्ता वास्तु या सेवा को खरीदता है तथा उसका लाभ लेता है व उसे इसका लाभ नही पहुचता है बल्कि इसके स्थान पर उसे हानि होती है तो यह स्तिथि उभोगता का शोषण कहलाता है उपभोक्ता के वास्तु या सेवा का लाभ न पहुचने के कारण कुछ हो सकते है जी निम्नलिखित है |



Consumer Protection Act 1986


1.वास्तु की गुणवत्ता में कमी होना |

2. लिखित मात्रा की तुलना में कम मात्रा की वास्तु देना |

3. वास्तु का शुद्ध न होना |

4.वस्तुपर्मानक इकाई का न होना |

5.सेवा की पूरी जानकारी न बताना | 

6. अपूर्ण सेवा प्रदान कराना |

7. सेवा से क्षति पहुचना |

8. सेवा का सुरक्षित होना |

9. सेवा से मानसिक क्षति पहुचना |


उपभोक्ता के शोषण से बचाव के लिए उपभोक्ता दिवस पर 24 दिसम्बर को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 पारित किया गया  |

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