C Tutorial : Learn C Programming With Example in Hindi

C programming in Hindi

कई चीज़े जो हम सुनते रहते है जो c लैंग्वेज में बने हुए है कंप्यूटर के कई ड्राईवर c लैंग्वेज में बने हुए है इनका पता आम लोगो नही पता होता है लेकिन जो प्रोग्रामिंग सिख रहे है उन्हें इस चीजों के बारे में पता होना आवश्यक है | कई ऑपरेटिंग सिस्टम c लैंग्वेज बने हुए है कुछ सर्वे के अनुसार c प्रोग्रामिंग सबसे ज्यादा काम आने वाली प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है | 

कंप्यूटर से बात करने की लैंग्वेज है | प्रोग्रामिंग स्किल्स में आपको किसी भी प्रोग्राम को सोल्व करना होगा | 

यहा कई कॉन्सेप्ट्स होते है जिन्हें पढना या समझना आवश्यक है | कई इंटरव्यू में भी c लैंग्वेज पूछी जाती है | यह हार्डवेयर इंटरेक्शन के लिए बहुत आवश्यक है | मशीनों की भी कंप्यूटर से कण्ट्रोल किया जाता है और यहा प्रोग्रामिंग बहुत जरुरी है | 

B लैंग्वेज के बाद c लैंग्वेज बनाई और यह B लैंग्वेज का ही एक मॉडिफाइड वर्शन है | कैलकुलेटर भी एक तरह का कंप्यूटर है और यह भी प्रोग्रामिंग के द्वारा बनाया गया है | 

कंप्यूटर में 0 1 के रूप में डाटा को सेव किया जाता है हार्डड्राइव में भी डाटा को 0 1 के रूप में डाटा को स्टोर किया जाता है | प्रोग्राम बनाने के लिए प्लानिंग की जाती है |

कंप्यूटर में प्रोसेसर, RAM हार्डडिस्क होते है | आपके द्वारा बनाया गया प्रोग्राम जब किसी को दिया जाता है तो वह EXE file के रूप में बनाया जाता है अर्थात आप अपने प्रोग्राम को हमेशा एक EXE File के रूप में देंगे और यूजर आपकी फाइल का उपयोग करने के लिए Double Click करेगा और आपकी फाइल की एक कॉपी कंप्यूटर में स्टोर हो जाएगी और यह फाइल RAM में लोड होगी और आपका प्रोगाम स्टार्ट होगा लेकिन आपका प्रोग्राम हार्डडिस्क में सेव होगा यही मेमोरी मैनेजमेंट है | 

प्रोग्रामिंग का अर्थ है जब हम किसी एक प्रोग्राम को Develop करते है तो उसे लिखने के लिए जिस लैंग्वेज का उपयोग करते है वह प्रोग्रामिंग कहलाता है कंप्यूटर की लैंग्वेज प्रोग्रामिंग हो टी है वह कंप्यूटर को निर्देश देता है 

History Of C Programming

फेमस प्रोग्रामिंग में C++ व c है व C Programming को 1972 में बनाया गया था | यह एक सिस्टम प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है यह एंड्राइड व क्रोम ऑपरेटिंग सिस्टम आदि को बनाने के काम आता है यह और कई लैंग्वेज की बजाय थोड़ी कठिन होती है

हेल्लो वर्ड प्रोग्राम को C Programming  का सबसे आसन प्रोग्राम है व इसकी कोडिंग को सीखना बहुत आसन है | आप online भी c प्रोग्रामिंग कर सकते है यदि आपके पास लैपटॉप या कंप्यूटर नही है तो आप अपने फोन में एक एप्लीकेशन के द्वारा इसका उपयोग कर सकते है | 

C program को बनाने से पहले आपको कुछ चीज़े सीखनी होंगी जैसे C प्रोग्राम को बनाने के लिए आपको #include <stdio.h> से शुरुआत करनी होती है और इसके बाद आपको int main() डालना होगा यह Default Function है | आपको Curly brace open  लगाना होगा व अपने कोड को लिखना होगा यह आपको हेल्लो वर्ल्ड प्रोग्राम लिखना होगा आपको printf (“Hello World”); को लिखना होगा 

यह print function है जोकि text को प्रिंट करता है | और आपको अपनी प्रोग्रामिंग के अंत में carly brace close को लिखना होगा  

आपको c प्रोग्रामिंग के लिए टर्बो के बजाय कोडब्लॉक्स का उपयोग कर सकते है यह सबसे ज्यादा उपयोग में लिए जाना वाला सॉफ्टवेर है इसे डाउनलोड करने के लिए आपको ब्राउज़र को ओपन करना है आपको ब्राउज़र पर कोडब्लॉक्स सर्च करना है 

Basics Of C Programming in Hindi

डाउनलोड आप्शन पर क्लिक करना है यहा आपको लेटेस्ट वर्शन मिल जाएगा व इस तरह आप इसे डाउनलोड कर सकते है आप इंस्टालर से इसे इनस्टॉल कर सकते है |

कोडब्लॉक्स को ओपन करने के बाद आपको फाइल मेनू से एक नई फाइल बनानी है और सेव पर क्लिक कर दीजिये यहा आपको अपनी फाइल के लिए एक फोल्डर सेलेक्ट करना होगा व अपने सॉफ्टवेर का नाम भी देना होगा | इसके बाद आपको प्रोग्राम बनाना है |  

c लैंग्वेज भी एक तरह की नेचुरल लैंग्वेज है जिस तरह लोग एक दुसरे से बात करने के लिए कम्युनिकेशन लैंग्वेज का उपयोग करते है उसी तरह कंप्यूटर से कम्युनिकेशन करने के लिए एक लैंग्वेज का उपयोग करना होगा |

c लैंग्वेज में जब आप कोडिंग करते है तो उसकी हर लाइन में वर्ड्स होते है और यही dentifiers होते है | Identifiers कांस्टेंट वेरिएबल व कीवर्ड में बाटा गया है |  


आप Identifiers का उपयोग करके कोडिंग करते है आपने मैथ में भी कांस्टेंट के बारे में पढ़ा होगा लेकिन मैथ में कांस्टेंट की वैल्यू कभी चेंज नही होती है लेकिन c लैंग्वेज में कांस्टेंट को डाटा या इनफार्मेशन के रूप में उपयोग लिया जाता है |


C Programming Concept in hindi

 

कांस्टेंट को 2 भागो में बाटा गया है | इनफार्मेशन को समझने के लिए हमने इन्हें 2 भागो में बाटा गया है |

 

प्राइमरी कांस्टेंट

 

सेकेंडरी कांस्टेंट

 

प्राइमरी कांस्टेंट को 3 भागो में बाटा गया है इनमे इन्टिजर रियल व करैक्टर है इन्टिजर का अर्थ एक ऐसा नंबर होता है जिसे पॉइंट नही लगा होता है इसे एक उदाहरण के रूप में भी समझा जा सकता है जैसे -84, 25, 0 आदि इन्टिजर है यदि आपको कोडिंग करते समय किसी की आयु की इनफार्मेशन देनी है तो आपको यहा इन्टिजर का उपयोग करना होगा | 


प्रोग्रामिंग करते समय आपको इनफार्मेशन का उपयोग करना होगा तो आपको सिर्फ यह पता लगाना है की आप जिस इनफार्मेशन की जरुरत है वह किस तरह का इन्टिजर है |

 

रियल कांस्टेंट वे नंबर होते है जिनमे पॉइंट लगा हुआ होता है आप इन्हें उदाहरण से भी समझ सकते है जैसे -3.12, 2.0 आदि यदि आप सोच रहे है की 1.0 या 2.0 यह इन्टिजर कांस्टेंट है  


यह इन्टिजर कांस्टेंट नही है आपने यह मैथ में पढ़ा होगा की 2.0 का अर्थ 2 है लेकिन प्रोग्रामिंग में 2.0 एक रियल कांस्टेंट है c प्रोग्रामिंगमें 1.0 व 1 लिखना दोनों अलग - अलग है |

 

करैक्टर कांस्टेंट में वे करैक्टर आते है जिन पर सिंगल कोट लगा हुआ होता है यही करैक्टर कांस्टेंट कहलाता है आप इसे एक उदाहरण से भी समझ सकते है ‘a’ व ‘v’ आदि कैपिटल में यदि ‘A’ लिखा जाये तो भी यह करैक्टर कांस्टेंट है | स्पेस भी एक करैक्टर कांस्टेंट है 


करैक्टर कांस्टेंट में 1 ही सिंबल होना आवश्यक है यदि आप किसी नाम को सिंबल कांस्टेंट में लिखते है जैसे ‘AVSVishal’ यह करैक्टर कांस्टेंट नही है क्योकि इसमेंएक से ज्यादा करैक्टर है |

 

यदि आप एक से ज्यादा करैक्टर को सिंगल कोट में लिखते है तो यह स्ट्रिंग कहलाता है | यह करैक्टर का एक समूह होता है | इसे आप एक उदाहरण से समझ सकते है जैसे ‘AVSVishal’ यह एक स्ट्रिंग है |

                                    

 


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